गयी भैंस पानी में…. : दाराब फ़ारूक़ी

इतने दिनों के बाद एक अति उत्तम हास्य व्यंग शैली में हिंदी लेख से मुलाकात हुई – ज़रूर पढ़े और फैलाएं !

KAFILA - 10 years of a common journey

Guest post by DARAB FAROOQUI

जी हाँ मैं भैंस हूँ और करीब 5000 साल से लगातार पानी में जा रही हूँ. जब भी किसी का कुछ भी बुरा हो रहा होता है तो हमेशा मुझे ही पानी में जाना पड़ता है. ना उस वक़्त मेरे नहाने की इच्छा होती और ना तैरने का मन. पर मुझे ना चाहते हुवे भी पानी में जाना पड़ता है.

तुम लोग कभी उस सफ़ेदमूही गाय को पानी में क्यों नहीं भेजते हो. और वैसे भी हम अल्पसंख्य हैं, हमसे कहीं ज्यादा गायें हैं भारत में. और शायद तुम्हे याद न हो, हमारे संविधान में सब बराबर हैं. पर इतना सब कुछ करने के बाद भी तुम लोगों ने हमें कभी अपना नहीं समझा. हमने क्या नहीं किया तुम्हारे लिये, तुम्हे अपने बच्चों का दूध दिया, तुम्हारे खेत जोते, तुम्हारे चूल्हे जलाये. कितने बलिदान दिए हमने पर तुम्हारे तो कान पर भैंस तक नहीं रेंगी.

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Author: harshT

Assistant Professor at the Missouri School of Journalism

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